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सफलता आपको प्रेरणा नहीं देती बल्कि सफलता के लिए शंघर्ष से आपको प्रेरणा मिलती है

निस्वार्थ प्रेम

निस्वार्थ प्रेम सेवा संसार की सबसे बड़ी ताकत जो दुनिया की हर बुरी ताकत को कमजोर कर देती हेै। सेवा का संचार हर इंसान के अन्दर होता है। मनुश्य अपने पारिवारिक दायित्वों को निभाने के लिए हर इंसान की सेवा नहीं कर पाता, इसलिए वह सिर्फ अपने बारे में सोचकर आगे निकल जाता है। कुछ लोग होते हेैं। जो सेवा का संकल्प लेते हुये, जिन्दगी की परेषानियों से जीतकर बहुत आगे निकल जाते है।

जीत का मंजर लेकर हारकर चलना तो इनकी आदत होती है, अंत में जीत से दुनिया की तकदीर अपने हाथों लिखने एक लम्बे काफिले के साथ चलकर, ईष्वर षक्ति का हिस्सा बन जाते हैं, संघर्श और हिम्मत के बिना सेवा का सरोकार हासिल करना हर किसी के बस की बात नहीं,लेकिन जो सेवा को ईष्वरीय षक्ति मान लेते है।परेषानी को दूर करने में त्याग और तपस्या के नायक बन जाते है।सेवक हमेषा मुसीबतों को गले लगाकर बड़ी से बड़ी समस्या को हल करने में कामयाब हो जाता हेै।यही सच्चा ईष्वर प्रेम है,जो सदा हमारे दुखों मेें साथ देेता है।कुछ इसी तरह बेबस जिन्दगी मुझे भी मिली,लाख परेषानियां आयी,लेकिन कैंसे दूर हो गयी पता ही नहीं चला, एक पल के लिए भगवान पर भरोसा करके चली,तो तपस्या से भरा जीवन आंखों में आंॅसू देकर संघर्श करने के लिए ललक उठता,अब तो कोई भी परेषानी दे,तो हंॅंसकर हल करने को उतारू हो जाती हूॅं,क्योंकि मैं जानती हॅू।ंजो मिला है वो देना भी होगा,लेकिन जाते-जाते कुछ इंसानियत के फर्ज और ईष्वर के दिये मानवतावादी जीवन का कर्ज भी अदा करना होगा।